हिमाचल के ऊंचे पहाड़, लकड़ी के घर, बाहर बर्फ और अंदर जलती अंगीठी। ऐसे मौसम में जब हाथ सुन्न हो जाते हैं, तब रसोई से उठती भाप में एक खुशबू फैलती है। वही खुशबू है हिमाचली सिड्डू की।
सिड्डू केवल एक व्यंजन नहीं, यह हिमाचल के गांवों की जीवनशैली, मौसम और सामूहिक मेहनत की कहानी है।
पुराने समय में जब गैस, ओवन या तंदूर नहीं होते थे, तब भाप में पकने वाला भोजन सबसे सुरक्षित और पौष्टिक माना जाता था। सिड्डू उसी परंपरा से निकला। इसे सर्दियों में इसलिए बनाया जाता था क्योंकि यह देर तक गर्म रहता है, भारी काम करने वाले शरीर को ऊर्जा देता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने देता।
हिमाचली सिड्डू का सांस्कृतिक महत्व
हिमाचल में सिड्डू अक्सर खास मौकों पर बनता था।
जब घर में मेहमान आए हों, जब बर्फबारी के बाद पहली धूप निकली हो या जब गांव में कोई सामूहिक काम पूरा हुआ हो।
महिलाएं आटा गूंथतीं, भरावन तैयार होता और बच्चे स्टीमर के पास बैठे इंतजार करते कि सिड्डू कब फूलकर तैयार होगा।
कई इलाकों में कहा जाता है कि जिस घर में सिड्डू अच्छे बनते हैं, वहां हाथों में सुकून और मन में धैर्य होता है।
हिमाचली सिड्डू आवश्यक सामग्री
आटे के लिए
-
गेहूं का आटा – 2 कप
-
यीस्ट या खमीर – 1 छोटा चम्मच
-
नमक – स्वादानुसार
-
गुनगुना पानी – जरूरत अनुसार
पारंपरिक भरावन के लिए
-
अखरोट मोटे पिसे हुए – 4 से 5
-
खसखस – 2 छोटे चम्मच
-
प्याज बारीक कटा – 1 मध्यम
-
अदरक कद्दूकस – 1 छोटा चम्मच
-
हरी मिर्च बारीक कटी – 1
-
हरा धनिया – 2 बड़े चम्मच
-
जीरा – 1 छोटा चम्मच
-
नमक – स्वादानुसार
-
सरसों का तेल या देसी घी – 1 बड़ा चम्मच
पुराने समय में भरावन मौसम और उपलब्धता के अनुसार बदलता था। कहीं अखरोट, कहीं मूंगफली और कहीं केवल मसाले।
हिमाचली सिड्डू बनाने की पूरी विधि
1. आटा गूंथने की कला
सबसे पहले आटे में नमक और यीस्ट मिलाएं।
गुनगुने पानी से नरम आटा गूंथें। आटा न ज्यादा सख्त हो, न ज्यादा ढीला।
अब इसे ढककर गर्म जगह पर 2 से 3 घंटे रख दें।
जब आटा फूलकर दोगुना हो जाए, तो समझिए सिड्डू की नींव तैयार है।
2. भरावन की खुशबू
कढ़ाही में सरसों का तेल या घी गरम करें।
जीरा डालें, फिर प्याज और अदरक डालकर हल्का सुनहरा होने दें।
अब हरी मिर्च, अखरोट, खसखस, नमक और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
भरावन ज्यादा सूखा नहीं होना चाहिए, हल्का नम रहना चाहिए।
3. सिड्डू का आकार देना
फूले हुए आटे की लोइयां बनाएं।
हर लोई को हल्का बेलें, बीच में भरावन रखें और चारों ओर से बंद कर दें।
हाथों से धीरे धीरे गोल आकार दें।
ध्यान रखें, दबाव ज्यादा होगा तो सिड्डू ठीक से फूलेगा नहीं।
4. भाप में पकाने का रहस्य
कुकर या स्टीमर में पानी उबालें।
सिड्डू को प्लेट या छलनी में रखें ताकि वे पानी को न छुएं।
ढक्कन बंद कर 15 से 20 मिनट तक भाप में पकाएं।
जब सिड्डू हल्के चमकदार दिखें और हाथ लगाने पर नरम महसूस हों, तो वे तैयार हैं।
हिमाचली सिड्डू परोसने की पारंपरिक शैली
गरम सिड्डू को तोड़ते ही अंदर से भाप निकलती है।
ऊपर से देसी घी डालें और साथ में दाल या सिर्फ नमक और घी।
कई गांवों में इसे राजमा की दाल या गाढ़ी सब्जी के साथ भी खाया जाता है।
पुराने लोगों की खास बातें
-
सिड्डू कभी जल्दी में नहीं बनता
-
आटे को जितना समय दोगे, स्वाद उतना बढ़ेगा
-
सिड्डू ठंड में शरीर को भीतर से गर्म करता है
आज के समय में हिमाचली सिड्डू
आज सिड्डू होटल और कैफे में मिलने लगा है, लेकिन असली स्वाद अभी भी गांव की रसोई में ही मिलता है।
जहां भाप, धैर्य और परंपरा एक साथ पकते हैं।



