टांकरी लिपि को पुनर्जीवित करने की पहल, हिम संस्कृति शोध संस्थान और राजकीय महाविद्यालय सलूणी के बीच MOU हस्ताक्षरित

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हिमाचल में टांकरी लिपि के पुनर्जीवन की पहल, हिम संस्कृति शोध संस्थान और राजकीय महाविद्यालय सलूणी के बीच एमओयू हस्ताक्षरित

देहुरी/आनी/कुल्लू, 6 अप्रैल 2026।
हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं भाषाई विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हिम संस्कृति शोध संस्थान, देहुरी ने राजकीय महाविद्यालय सलूणी, चम्बा के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता 6 अप्रैल, 2026 को वर्चुअल माध्यम से संपन्न हुआ।

इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के पुनर्जीवन, संरक्षण और प्रसार को बढ़ावा देना है। विशेष रूप से विलुप्तप्राय टांकरी लिपि और क्षेत्रीय बोलियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह पहल स्वदेशी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए उसे शैक्षणिक और शोध गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से कार्यशालाएं, प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके माध्यम से छात्र और शोधार्थी टांकरी लिपि को सीखने और उससे जुड़ने का अवसर प्राप्त करेंगे। साथ ही क्षेत्रीय सर्वेक्षण, पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण, पारंपरिक अभिलेखों का डिजिटलीकरण और स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी कार्य किया जाएगा।

इस पहल से न केवल छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ मिलेगा, बल्कि व्यापक समाज में भी स्वदेशी लिपियों और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही भाषाविज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक अध्ययन के क्षेत्र में अंतर्विषयक शोध के नए अवसर भी सृजित होंगे।

दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों ने इसे सांस्कृतिक संरक्षण और शैक्षणिक समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक पहल बताया। उन्होंने कहा कि वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह साझेदारी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करेगी।

यह एमओयू तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके सफल क्रियान्वयन और निगरानी के लिए एक संयुक्त समन्वय समिति का गठन भी किया जाएगा।

यह सहयोग हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा और अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को और सशक्त करेगा।

जारीकर्ता:
सचिव
हिम संस्कृति शोध संस्थान, देहुरी
आनी, जिला चंबा, हिमाचल प्रदेश

HDM Desk
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