हिमाचल प्रदेश में अब प्लैनोकफ डी सिरप का बिक्री से लेकर इस्तेमाल तक सबकुछ पूरी तरह बंद कर दिया गया है। राज्य औषधि नियंत्रक प्रशासन ने लोगों की सेहत को प्राथमिकता देते हुए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह सिरप खांसी और जुकाम में आम तौर पर प्रयोग किया जाता रहा है, मगर लैब जांच के बाद इसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक घोषित कर दिया गया।
ताज़ा आदेशों के अनुसार इस दवा के बैच नंबर आर 2053101 जिसकी निर्माण तिथि फरवरी 2025 और एक्सपायरी जनवरी 2027 है उसमें डायएथिलीन ग्लाइकॉल नामक जहरीला तत्व 0.35 प्रतिशत पाया गया।
यह रसायन ब्रेक फ्लुइड और एंटीफ्रीज जैसे औद्योगिक उत्पादों में उपयोग किया जाता है और शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायएथिलीन ग्लाइकॉल गुर्दों, यकृत और नर्व सिस्टम पर सीधा हमला करता है।
इसके सेवन से उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, दृष्टि धुंधली होना और गंभीर मामलों में गुर्दे फेल होने जैसे प्रभाव दिख सकते हैं। बच्चों पर इसका असर और भी तेज पड़ सकता है और गंभीर स्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दवाओं की गुणवत्ता जांच व्यवस्था और मजबूत की जाएगी। सभी दुकानों और संस्थानों को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
राज्य औषधि नियंत्रक डॉ मनीष कपूर ने बताया कि हिमाचल में प्लैनोकफ डी सिरप की बिक्री, वितरण और उपयोग अब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
सभी केमिस्टों, अस्पतालों, मेडिकल स्टोर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को आदेश दिया गया है कि वे तुरंत अपना स्टॉक हटा दें और यदि कहीं यह दवा उपलब्ध दिखाई दे तो तुरंत ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन को इसकी जानकारी दें।
हिमाचल के केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एलायंस से भी अपील की गई है कि वे अपने नेटवर्क के माध्यम से इस आदेश को बड़े पैमाने पर पहुंचाएं ताकि जनता तक गलती से भी यह दवा न पहुंच सके।


